Publish Date: Thu, 19 Jun 2025 (13:33 IST)
Updated Date: Thu, 19 Jun 2025 (13:43 IST)
shani ki vakri chal ka prabhav 2025: वर्तमान में चल रही मंगल और केतु की युति के बीच आगामी 13 जुलाई 2025 को रविवार सुबह 09:36 पर शनि मीन राशि में वक्री हो रहे हैं, शनि देव यहां पर 28 नवंबर 2025 को सुबह 09:20 तक वक्री अवस्था में रहेंगे। यानि कुल 130 दिन वे वक्री रहेंगे। शनि ने मीन राशि में 29 मार्च 2025 को प्रवेश किया था। इस राशि में शनिदेव 3 जून 2027 तक रहकर लोगों के कर्मों की सजा तय कर रहे हैं।
शनि की वक्री चाल का प्रभाव: वक्री अर्थात किसी राशि में उल्टी दिशा में गति करने लगते हैं। सूर्य और चन्द्र को छोड़कर सभी ग्रह वक्री होते हैं। ज्योतिषियों का एक वर्ग के अनुसार अगर कोई ग्रह अपनी उच्च की राशि में स्थित होने पर वक्री हो जाता है तो उसके फल अशुभ हो जाते हैं तथा यदि कोई ग्रह अपनी नीच की राशि में वक्री हो जाता है तो उसके फल शुभ हो जाते हैं।
शनि ग्रह की दो राशियां है- पहली कुंभ और दूसरी मकर। यह ग्रह तुला में उच्च और मेष में नीच का होता है। जब यह ग्रह वक्री होता है तो स्वाभाविक रूप से तुला राशि वालों के लिए सकारात्मक और मेष राशि वालों के लिए नकारात्मक असर देता है। लेकिन शनि जब अन्य राशियों में भ्रम करता है तो उसका अलग असर होता है। यदि वह मेष की मित्र राशि धनु में भ्रमण कर रहा है तो मेष राशि वालों पर नकारात्मक असर नहीं डालेगा।
भड़केगा और युद्ध: हालांकि वर्तमान में शनि मीन राशि में गोचर करके अशुभ फल प्रदान कर रहे हैं क्योंकि मीन राशि गुरु की राशि है और गुरु ग्रह लोगों के जीवन में सुख, शांति और आयु बढ़ाने वाला है। शनि से यह राशि पीड़ित होने से गुरु के फलों में भी कमी आ गई है। आधी दुनिया में इस वक्त लोग युद्ध या जन विद्रोह से परेशान है। कहते हैं कि जब शनि वक्री होते हैं तो लंबे काल तक दर्द देने वाली घटनाओं की शुरुआत करते हैं। यानि आने वाले समय में देश और दुनिया के राजनीतिक हालात और बिगड़ने वाले हैं और युद्ध भड़कने वाले हैं। तीसरे विश्व की ओर दुनिया अपने कदम बड़ा रही है। शनि अपना प्रभाव उन देशों पर अधिक डालेगा जहां लोकतांत्रित व्यवस्था है क्योंकि शनि लोकतांत्रिक व्यवस्था के भी कारक है। जिन देशों का संबंध मीन राशि से है, वहां पर विशेष प्रभाव देखने को मिल सकता है।
इन 5 राशियों को करेंगे प्रभावित: वर्तमान समय शनि मीन में गोचर कर रहे हैं, मीन राशि के स्वामी देव गुरु बृहस्पति हैं। मेष, मिथुन, कन्या, वृश्चिक एवं धनु राशि के जातकों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत बताई जा रही है। विशेषकर आर्थिक लेनदेन, पारिवारिक मामले, मतभेद एवं विवादों को लेकर संयम रखना जरूरी है।
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