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Paush maas amavasya 2025: पौष मास की अमावस्या का महत्व और उपाय अचूक उपाय

WD Feature Desk
बुधवार, 17 दिसंबर 2025 (15:49 IST)
Paush maas amavasya 2025: पौष मास की अमावस्या, जिसे 'छोटा पितृपक्ष' भी कहा जाता है, आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। पौष मास सूर्य देव की उपासना का महीना है, और इस माह की अमावस्या पर पितरों की शांति के लिए किए गए कार्य विशेष फलदायी होते हैं। वर्ष 2025 में पौष अमावस्या 19 दिसंबर (शुक्रवार) और 20 दिसंबर (शनिवार) के संगम पर मनाई जाएगी।  
 
1. पौष अमावस्या का धार्मिक महत्व:
पितृ दोष से मुक्ति: यह अमावस्या मुख्य रूप से पितरों के तर्पण और श्राद्ध के लिए समर्पित है। माना जाता है कि इस दिन दान करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है।
 
सूर्य और चंद्रमा का संयोग: पौष मास में सूर्य 'धनु' राशि में होते हैं। सूर्य और चंद्रमा की यह युति मानसिक शांति और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करने वाली मानी जाती है।
 
पुण्य फल की प्राप्ति: इस दिन पवित्र नदियों (जैसे गंगा, यमुना या नर्मदा) में स्नान करने से पूरे वर्ष के पापों का शमन होता है।
 
2. सुख-समृद्धि के लिए अचूक उपाय:
यदि आप जीवन में बाधाओं या आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं, तो पौष अमावस्या पर ये उपाय अवश्य करें:
 
पितृ तर्पण और श्राद्ध
विधि: तांबे के लोटे में जल, काले तिल, दूध और सफेद फूल डालकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों को जल अर्पित करें।
लाभ: इससे पितृ प्रसन्न होते हैं और वंश वृद्धि व सफलता का आशीर्वाद देते हैं।
 
पीपल के वृक्ष की पूजा
अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। पीपल में त्रिदेवों और पितरों का वास माना गया है, इसलिए इसकी परिक्रमा करने से शनि दोष और बाधाएं दूर होती हैं।
 
'गीता' का पाठ
पौष मास में भगवान विष्णु के स्वरूप की पूजा होती है। इस दिन श्रीमद्भगवद्गीता के सातवें अध्याय का पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है।
 
दान-पुण्य (महत्वपूर्ण)
चूंकि यह सर्दियों का समय होता है, इसलिए इस दिन काले तिल, ऊनी वस्त्र (कंबल आदि), गुड़ और अनाज का दान करना चाहिए। यह दान सीधे शनि और सूर्य को मजबूत करता है।
 
चींटियों और मछलियों को भोजन
सूखे आटे में चीनी मिलाकर चींटियों को खिलाएं और मछलियों को आटे की गोलियां दें। यह उपाय कर्ज से मुक्ति और आकस्मिक संकटों से बचाव के लिए लाल किताब में भी उत्तम बताया गया है।
 
द्वार पर दीपक जलाना: 
चूंकि इस बार अमावस्या शुक्रवार और शनिवार के बीच है, इसलिए माता लक्ष्मी और शनि देव दोनों की कृपा पाने का यह दुर्लभ संयोग है। शाम को घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाना सौभाग्य लेकर आएगा।
 
क्या न करें?
इस दिन तामसिक भोजन (मांस, मदिरा) से परहेज करें।
घर में क्लेश न करें और क्रोध पर नियंत्रण रखें, क्योंकि अमावस्या के दिन मानसिक स्थिति संवेदनशील होती है।

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