Hanuman Chalisa

एक ही समय पर जन्मे दो बच्चों का जीवन अलग क्यों होता है, पढ़ें विश्लेषण

पं. हेमन्त रिछारिया
-ज्योतिर्विद पं. हेमन्त रिछारिया
 
ज्योतिषियों से एक प्रश्न अक्सर पूछा जाता है कि 'जब एक ही समय पर विश्व में कई बच्चे जन्म लेते हैं तो उनकी जन्मकुण्डली एक होने के बावजूद उनका जीवन भिन्न कैसे होता है? ज्योतिष पर विश्वास नहीं करने वालों के लिए यह प्रश्न ब्रह्मास्त्र की तरह है। यह प्रश्न बड़े से बड़े ज्योतिष के जानकार की प्रतिष्ठा को ध्वस्त करने की सामर्थ्य रखता है। जब इस ब्रह्मास्त्र रूपी प्रश्न का प्रहार मुझ पर किया गया तो मैंने ढाल के स्थान पर ज्योतिष शास्त्र रूपी अस्त्र से ही इसे काटना श्रेयस्कर समझा।

इस प्रश्न को लेकर मैंने बहुत अनुसंधान किया, कई वैज्ञानिकों के ब्रह्माण्ड विषयक अनुसंधान के निष्कर्षों की पड़ताल की, कई सनातन ग्रंथों को खंगाला और अपने कुछ वर्षों के ज्योतिषीय अनुभव को इसमें समावेशित करते हुए मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि किसी जातक के जीवन निर्धारण में केवल जन्म-समय ही नहीं अपितु गर्भाधान-समय और उसके प्रारब्ध (पूर्व संचित कर्म) की भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। 
 
गर्भाधान संस्कार और ज्योतिष इस प्रकार ज्योतिष तीन आयामों पर आधारित है, ये तीन आयाम हैं-1. प्रारब्ध 2. गर्भाधान 3.जन्म। इन्हीं तीन महत्वपूर्ण आयामों अर्थात् जन्म-समय, गर्भाधान-समय एवं प्रारब्ध के समेकित प्रभाव से ही किसी जातक का संपूर्ण जीवन संचालित होता है। किसी जातक की जन्मपत्रिका के निर्माण में जो सर्वाधिक महत्वपूर्ण तत्व है; वह है- समय। अब जन्म-समय को लेकर भी ज्योतिषाचार्यों में मतभेद है, कुछ विद्वान शिशु के रोने को ही सही मानते हैं, वहीं कुछ नाल-विच्छेदन के समय को सही ठहराते हैं, खैर; यहां हमारा मुद्दा जन्म-समय नहीं है। 
 
किसी भी जातक की जन्मपत्रिका के निर्माण के लिए उसके जन्म का समय ज्ञात होना अति-आवश्यक है। अब जन्मसमय तो ज्ञात किया जा सकता है किंतु गर्भाधान का समय ज्ञात नहीं किया जा सकता इसीलिए हमारे शास्त्रों में “गर्भाधान” संस्कार के द्वारा उस समय को बहुत सीमा तक ज्ञात करने व्यवस्था है। 
 
यह अब वैज्ञानिक अनुसंधानों से स्पष्ट हो चुका है कि माता-पिता का पूर्ण प्रभाव बच्चे पर पड़ता है, विशेषकर मां का, क्योंकि बच्चा मां के ही पेट नौ माह तक आश्रय पाता है। आजकल सोनोग्राफ़ी और डीएनए जैसी तकनीक इस बात को प्रमाणित करती हैं। अतः जिस समय एक दंपत्ति गर्भाधान कर रहे होते हैं उस समय ब्रह्माण्ड में नक्षत्रों की व्यवस्था और ग्रहस्थितियां भी होने वाले बच्चे पर पूर्ण प्रभाव डालती हैं। 
 
इस महत्वपूर्ण तथ्य को ध्यान में रखते हुए हमारे शास्त्रों में “गर्भाधान” के मुर्हूत की व्यवस्था है। गर्भाधान का दिन, समय,तिथि,वार,नक्षत्र,चंद्र स्थिति, दंपत्तियों की कुण्डलियों का ग्रह-गोचर आदि सभी बातों का गहनता से परीक्षण करने के उपरान्त ही “गर्भाधान” का मुर्हूत निकाला जाता है। अब यदि किन्हीं जातकों का जन्म इस समान त्रिआयामी व्यवस्था में होता है (जो असंभव है) तो उनका जीवन भी ठीक एक जैसा ही होगा इसमें तनिक भी संदेह नहीं है। 
 
यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि हमें इन तीन आयामों में से केवल एक ही आयाम अर्थात् जन्म-समय ज्ञात होता है, दूसरा आयाम अर्थात् गर्भाधान-समय हमें सामान्यतः ज्ञात नहीं होता किंतु उसे ज्ञात किया जा सकता है परन्तु तीसरा आयाम अर्थात् प्रारब्ध ना तो हमें ज्ञात होता है और ना ही सामान्यतः उसे ज्ञात किया जा सकता है इसलिए इस समूचे विश्व में एक ही समय जन्म लेने वाले व्यक्तियों का जीवन एक-दूसरे से भिन्न पाया जाता है। ज्योतिष मनुष्य के भविष्य को ज्ञात करने की पद्धति का नाम है, ये पद्धतियां भिन्न हो सकती हैं। इन पद्धतियों को समय के साथ अद्यतन (अपडेट) करने की भी आवश्यकता है। एक योगी भी किसी व्यक्ति के बारे उतनी ही सटीक भविष्यवाणी कर सकता है जितनी एक जन्मपत्रिका देखने वाला ज्योतिषी या एक हस्तरेखा विशेषज्ञ कर सकता है और यह भी संभव है कि इन तीनों में योगी सर्वाधिक प्रामाणिक साबित हो।

“ज्योतिष” एक समुद्र की भांति अथाह है इसमें जितना गहरा उतरेंगे आगे बढ़ने की संभावनाएं भी उतनी ही बढ़ती जाएंगी। जब तक भविष्य है तब तक ज्योतिष भी है। अतः ज्योतिष के संबंध में क्षुद्र एवं संकुचित दृष्टिकोण अपनाकर केवल अपने अहं की तुष्टि के लिए प्रश्न उठाने के स्थान पर इसके वास्तविक विराट स्वरूप को समझकर जीवन में इसकी महत्ता स्वीकार करना अपेक्षाकृत अधिक लाभप्रद है।

ALSO READ: चंद्रमा कमजोर है तो इन 20 उपायों को आजमाएं, मनचाही सफलता पाएं
 

Show comments

ज़रूर पढ़ें

शुक्र की वृषभ राशि में मंगल का प्रवेश, 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, धन और करियर में मिल सकता है बड़ा लाभ

Muharram month 2026: मोहर्रम मास का इस्लाम धर्म में महत्व और परंपरा जानें

घर में कॉकरोच दिखना क्यों माना जाता है अशुभ? जानें ज्योतिष और वास्तु के संकेत

मंगल का कृतिका नक्षत्र में प्रवेश: 4 राशियों की किस्मत में होगा बड़ा बदलाव, जानें असर

कुंभ राशिफल 2026: शनि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण और गुरु का अमृत प्रभाव; जानें करियर, धन और सेहत का पूरा विश्लेषण

सभी देखें

नवीनतम

गुरु का राहु से और केतु का शनि से बना है षडाष्टक योग, 5 राशियों के लिए चल रहा है शानदार समय

20 June Birthday: आपको 20 जून, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 20 जून 2026: शनिवार का पंचांग और शुभ समय

राहु के नक्षत्र में सूर्य का प्रवेश: 4 राशियों की चमकेगी किस्मत, इन राशियों को रहना होगा सावधान

बुध का कर्क राशि में गोचर: 12 राशियों पर क्या होगा असर? जानिए पूरा राशिफल

अगला लेख