Publish Date: Wed, 02 Apr 2025 (11:32 IST)
Updated Date: Wed, 02 Apr 2025 (11:40 IST)
ॐ आपदामप हर्तारम दातारं सर्व सम्पदाम।
लोकाभिरामं श्री रामं भूयो भूयो नामाम्यहम।।
श्री रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे।
रघुनाथाय नाथाय सीताया पतये नमः।।
लोकाभिरामं रणरंगधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्।
कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये।।
नीलांबुजश्यामलकोमलांगं सीतासमारोपितवामभागम्।
पाणौ महासायकचारुचापं नमामि रामं रघुवंशनाथम्।।
अर्थ:
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ॐ आपदाओं का हरण करने वाले, सभी सम्पदाओं को प्रदान करने वाले श्री राम को प्रणाम करता हूं।
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सम्पूर्ण लोकों में सुन्दर श्री राम मैं सम्पूर्ण लोकों में सुन्दर भगवान श्री राम को बार बार प्रणाम करता हूँ।
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राम, रामभद्र, रामचंद्र, विधात स्वरूप , रघुनाथ, प्रभु एवं सीताजी के स्वामी की मैं वंदना करता हूं। इस लोक और सब लोक में सर्वाधिक सुन्दर तथा रणक्रीडा में धीर, कमलनेत्र, रघुवंश नायक, करुणाकी मूर्ति और करुणा के भण्डार रुपी श्रीराम की शरण में हूं।
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रघुवंश के कुलनायक प्रभु श्री रामको वंदन जिनका कोमल शरीर श्याम रंग के कमल समान है।
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जिनके वामांगी सीता माता है जिनके हाथमें धनुष बाण सुशोभित है।