Hanuman Chalisa

84 महादेव : श्री कुसुमेश्वर महादेव(38)

Webdunia
एक बार शिव पार्वती दोनों महाकाल वन में भ्रमण कर रहे थे। वहां गणेश बालकों के समूह में खेल रहा था। शिव ने पार्वती से कहा कि यह जो बालक फूलों से खेल रहा है और अन्य बालक उस पर पुष्प वर्षा कर रहे हैं वह उन्हें बहुत प्रिय है। शिव ने वह बालक पार्वती को दे दिया। पार्वती ने पुत्र को देखने की इच्छा से अपनी सखी विजया से कहा कि वह जाए और बालक गणेश को लेकर आए।


विजया गणेश बालकों के समूह में गई ओर उसे मनाकर कैलाश ले आई। यहां गणेश को उन्होंने विभिन्न आभूषणों ओर चंदन व पुष्पों से सज्जित किया ओर फिर शिव गणों के समूह में खेलने के लिए छोड़ दिया। बालक वहां भी पुष्पों से खेलता रहा। पार्वती ने शिवजी से कहा कि यह मेरा पुत्र है इसे आप वरदान दे कि यह सभी गणों में सबसे पहले पूज्य होगा ओर कुसुमों में मंडित होने के कारण इसका नाम कुसुमेश्वर होगा। शिवजी ने कहा कि कुसुमेश्वर का जो भी मनुष्य दर्शन कर पूजन करेगा उसे कभी कोई पाप नहीं लगेगा। कुसुमेश्वर की जो भी पुष्पों से पूजन करेगा वह अंतकाल में शिवलोक को प्राप्त होगा। शिव के वरदान से कुसुमेश्वर शिवलिंग के रूप में महाकाल वन में स्थापित हुआ।

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

मीन राशि में 5 ग्रहों की बड़ी हलचल: इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, क्या आपकी राशि है शामिल?

सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में, 3 राशियों के लिए गोल्डन टाइम

शनिदेव की कृपा के ये गुप्त संकेत पहचानें, जीवन में आएंगे बड़े बदलाव

क्या आपकी कुंडली में है गंडमूल दोष? तुरंत करें ये 5 असरदार उपाय

मेष राशि में सूर्य का प्लूटो से स्क्वायर, क्या होगा 4 राशियों पर इसका प्रभाव

सभी देखें

धर्म संसार

Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (30 अप्रैल, 2026)

30 April Birthday: आपको 30 अप्रैल, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 30 अप्रैल 2026: गुरुवार का पंचांग और शुभ समय

बंगाल चुनाव 2026: BJP की जीत पर क्यों मच सकता है बवाल? ज्योतिषीय संकेत

बंगाल चुनाव 2026: ममता या मोदी, क्‍या BJP होगी पास, TMC फेल, क्या कहते हैं ज्योतिष?