Hanuman Chalisa

84 महादेव : श्री अभिमुक्तेश्वर महादेव(78)

Webdunia
शाकल नाम के नगर में राजा थे, चित्रसेन। उनकी रानी का नाम था चन्द्रप्रभा। राजा-रानी दोनों रूपवान थे। उनकी एक पुत्री हुई वह भी अत्यंत सुंदर थी, इस कारण राजा ने उसका नाम रखा लावण्यावती। लावण्यावती को पूर्व जन्म की बातें याद थी। लावण्यावती युवा हुई तो राजा ने उसे बुलाया व कहा कि बताओ बेटी में तुम्हारा विवाह किससे करूं? राजा की बात सुनकर लावण्यावती कभी रोती तो कभी हंसने लगती। राजा ने उसका कारण पूछा तो उसने कहा कि पूर्व जन्म में वह प्राग्ज्योतिषपुर में हरस्वामी की स्त्री थी। रूपवान होने के बाद भी उसके पति ब्रह्मचर्य का पालन करते थे। उससे क्रोधित रहते थे। एक बार वह अपने पिता के घर गई, उन्हें पूरी बात बताई। उसके पिता ने उसे अभिमंत्रित वस्तुएं तथा मंत्र दिए, जिससे उसका पति उसके वश में हो गया। पति के साथ सुखी जीवन जीने के बाद उसकी मृत्यु हो गई पर वह नरक को प्राप्त हुई। यहां तरह-तरह की यातनाएं भोगने के बाद पापों का कुछ नाश करने के लिए वह एक चांडाल के घर उसका जन्म हुआ।

यहां सुंदर रूप पाने के बाद उसके शरीर पर फोड़े हो गए ओर जानवर उसे काटने लगे। उनसे बचने के लिए वह भागी ओर महाकाल वन पहुंच गई। यहां उसने भगवान शिव व पिप्लादेश्वर के दर्शन किए। दर्शन के कारण उसे स्वर्ग की प्राप्ति हुई। स्वर्ग में देवताओं के साथ रहने के कारण मेरा आपके यहां जन्म हुआ है। कन्या ने राजा से कहा कि इस जन्म में भी मैं अवंतिका नगरी में शिव के दर्शन करूंगी। राजा अपनी सेना के साथ महाकाल वन आया और कन्या व रानी के साथ शिवजी के दर्शन किए। लावण्यावती यहां शिवलिंग के दर्शन-पूजन कर देह त्याग कर शिव में समाहित हो गई।

पार्वती जी ने शिवलिंग को अभिमुक्तेश्वर नाम दिया। मान्यता है कि जो भी मनुष्य अभिमुक्तेश्वर महोदव के दर्शन-पूजन करता है उसकी मुक्ति अवश्य होती है। उसे मृत्यु का भय नहीं होता है। यह मंदिर सिंहपुरी के मंगलनाथ मंदिर के पास स्थित है। 

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

आदि शंकराचार्य का काल निर्धारण: 508 ईसा पूर्व या 788 ईस्वी में हुए थे शंकराचार्य?

अचानक बदलने वाली है इन 5 राशियों की तकदीर, ग्रहों का बड़ा संकेत

नास्त्रेदमस को टक्कर देते भारत के 7 भविष्यवक्ता, जानें चौंकाने वाली भविष्यवाणियां

मांगलिक दोष और वैवाहिक जीवन: क्या वाकई यह डरावना है या सिर्फ एक भ्रांति?

करियर का चुनाव और कुंडली का दसवां भाव: ग्रहों के अनुसार चुनें सही कार्यक्षेत्र

सभी देखें

धर्म संसार

Weekly Numerology Horoscope 2026: साप्ताहिक अंक राशिफल (27 से 3 मई 2026), जानें करियर, पैसा और प्यार का पूरा हाल

कैवल्य ज्ञान क्या है? जानें इसका सही अर्थ और इसे प्राप्त करने के प्रभावी तरीके

सिद्धिलक्ष्मी जयंती 2026: सफलता और समृद्धि के संगम का महापर्व

त्रिशूर पूरम 2026: केरल की सांस्कृतिक विरासत पूरमों के पूरम का भव्य शंखनाद

Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (25 अप्रैल, 2026)