Publish Date: Fri, 02 Aug 2019 (22:12 IST)
Updated Date: Fri, 02 Aug 2019 (22:27 IST)
नई दिल्ली। देश में मजदूरी की अदायगी में लैंगिक भेदभाव को समाप्त करने, मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा देने के साथ ही कारोबारी माहौल को सुगम बनाने के प्रावधान वाला विधेयक शुक्रवार को राज्यसभा में पेश किया गया। सरकार के इस बड़े कदम से 50 करोड़ कामगारों का फायदा होगा।
मजदूरी संहिता, 2019 विधेयक में श्रम मामलों की स्थायी समिति की कई सिफारिशों को भी शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि स्थायी समिति ने कुल 24 सिफारिशें की थीं जिसमें से 17 को स्वीकार किया गया है।
विधेयक पेश करते हुए श्रम कल्याण मंत्री संतोष गंगवार ने कहा कि यह मजदूरों को न्यूनतम वेतन तथा देश के 50 करोड़ कामगारों को समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह कदम बदलते सामाजिक आर्थिक परिवेश के अनुरूप में मजदूरी के निर्धारण और मजदूरों के जीवन को सरल बनाने, मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने तथा व्यापार सुगमता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
उन्होंने कहा कि इस विधेयक के कारण अब असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को भी न्यूनतम मजदूरी का अधिकार प्राप्त होगा। मजदूरों को उनकी मजदूरी समय पर दी जाए, इस बात को भी इसमें सुनिश्चित किया गया है। श्रम कल्याण मंत्री ने कहा कि विधेयक के तहत काम से निकाले जाने पर या काम छोड़ने की स्थिति में मजदूरों द्वारा अपने वेतन एवं भत्तों के भुगतान के लिए दावा करने की समय सीमा को बढ़ा कर 3 साल कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि इसमें निरीक्षण की व्यवस्था को पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाया गया है। इससे संगठित एवं असंगठित क्षेत्र के 50 करोड़ मजदूरों को लाभ मिलेगा।
केंद्रीय मंत्री गंगवार ने कहा कि 2002 में इस पर श्रम संबंधी समिति ने विचार किया था और कहा था कि श्रम संबंधी 44 कानूनों को कम किया जाए। 2014 में हमारी सरकार आने के बाद इस दिशा में पहल हुई और अब हम इसे लेकर आए हैं। इस बारे में श्रम संगठनों, राज्यों, उद्योगपतियों से चर्चा की गई है। यह वास्तव में मजदूरों के हित में है। (भाषा)