Daily Horoscope
✕

हिन्दी कविता : रजनीगंधा...

सुशील कुमार शर्मा
प्रतिलिपि कविता सम्मान हेतु
 
रजनीगंधा फूल-सा, 
महक उठा संसार। 
प्रिय संगम ऐसा हुआ, 
तन पर चढ़ा खुमार। 
 
तन पर चढ़ा खुमार, 
प्रमुदित हृदय का आंगन। 
रजनीगंधा खिला, 
आज जीवन के मधुवन। 
 
कह सुशील कविराय, 
खिला तन प्रेम सुगंधा। 
अनुपम रूप अनूप, 
देह है रजनीगंधा। 
 
रजनीगंधा की महक, 
फैली चारों ओर। 
प्रीतम मादक हो रहे, 
चला नहीं कछु जोर। 
 
चला नहीं कछु जोर, 
बांह जरा ऐसी जकड़ी। 
तन में उठत मरोड़, 
कलाई ऐसी पकड़ी। 
 
कह सुशील कविराय, 
प्रेम बिन जीवन अंधा। 
मृदुल प्रेम प्रिय संग, 
मन बना रजनीगंधा। 
 
 
Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

नवीनतम

मूर्खता भी बन सकती है कृत्रिम बुद्धिमत्ता, AI पर क्यों आमने-सामने हैं अमेरिका और चीन

कब मनाया जाएगा आचार्य विद्यासागर का जन्‍मोत्‍सव, जानिए उनके जीवन से जुड़ी खास बातें...

कौन थे महर्षि वाल्मीकि? कब मनाई जाएगी उनकी जयंती? जानिए उनके बारे में रोचक बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शक्ति और सामर्थ्य से सार्थक हो रहा है भारत

विश्वास टूटता कहां है और बनता कैसे है?

अगला लेख