Dharma Sangrah

कविता : प्रेम शब्द बड़ा मीठा-मीठा

Webdunia
Poem in Hindi

- पुरुषोत्तम व्यास
 
ग्रीष्म के दिनों में आम
जाड़े के दिनों में जाम
 
बाग में खिले कुसुम
मंद-मंद बहती समीर
 
प्रेम शब्द बड़ा मीठा-मीठा
 
हल्के-हल्के शब्द भाव से
ह्रदय में भरा-भरा उजास
 
धीमे-धीमे जलता हुआ दीप
चम-चमाता चंद्रमा अति करीब
 
प्रेम शब्द बड़ा मीठा-मीठा
 
पूछना नहीं अब किससे कुछ
मूंद नयनों को रहता अपने संग...
 
न चाह अब किससे कुछ
ईश्वर का मिला अनुपम प्रेम
 
प्रेम शब्द बड़ा मीठा-मीठा। 

(वेबदुनिया पर दिए किसी भी कंटेट के प्रकाशन के लिए लेखक/वेबदुनिया की अनुमति/स्वीकृति आवश्यक है, इसके बिना रचनाओं/लेखों का उपयोग वर्जित है...)
 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

क्या एक पुत्र भी गुरु हो सकता है? माता देवहूति का अद्भुत जीवन

Low Blood Sugar: हाइपोग्लाइसीमिया, बॉडी में शुगर कम होने पर क्या लक्षण महसूस होते हैं?

Indian Gooseberry: आंवला का जादू: रोज एक आंवला खाने से बालों और आंखों में होंगे ये 7 बड़े बदलाव

मृत्युपूर्व चेतना के लौटने का चमत्कार

बहुत ज्यादा सोचते हैं (Overthinking)? दिमाग को शांत और खुश रखने के लिए रोज करें ये 7 आसान योगासन

सभी देखें

नवीनतम

Rani Avanti Bai Lodhi: 20 मार्च, रानी अवंति बाई बलिदान दिवस, जानें 5 खास बातें

घर में यदि गैस और इंडक्शन दोनों नहीं है, तो इन 5 आसान तरीकों से फटाफट पकेगा खाना

यदि खत्म हो गई है गैस तो परेशान न हो, बिना LPG के जल्दी से बनाएं ये 5 आसान डिश

Jhulelal Jayanti 2026: वर्ष 2026 में झूलेलाल जयंती कब मनाई जाएगी?

विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस क्यों मनाया जाता है? जानें इतिहास, थीम, महत्व और उपभोक्ताओं के अधिकार

अगला लेख