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कविता: आने वाला नया साल है...

शम्भू नाथ
आने वाला नया साल है,
अवगुण को हम छोड़ेंगे।
संस्कार भरपूर सुज्जित,
सदगुणों से नाता जोड़ेंगे।
 
वक्त के साथ सीखेंगे चलना,
आलस्य नहीं अपनाएंगे।
नूतन वर्ष में प्रात:काल ही,
उठकर टहल कर आएंगे।
 
बीड़ी-सिगरेट-शराब छोड़कर,
गंदी अभिलाषा को तोड़ेंगे।
संस्कार भरपूर सुज्जित,
सदगुणों से नाता जोड़ेंगे।
 
झूठे लोगों से दूर रहेंगे,
खुद भी झूठ न बोलेंगे।
सच्चाई पर स्वयं ही चलके,
सच की गठरी खोलेंगे।
 
मन में मैल का जो घड़ा भरा है, 
उस घड़े को खुद ही फोड़ेंगे।
संस्कार भरपूर सुज्जित,
सदगुणों से नाता जोड़ेंगे।
 
बैर-विरोध न छू पाएंगी,
न लालच हमको घेरेगी।
न उच्च विचार से रहेंगे वंचित,
न गंदी सोच ही लथेरेगी।
 
मान-सम्मान भी बना रहेगा,
उत्तम बीज को बोएंगे।
संस्कार भरपूर सुज्जित,
सदगुणों से नाता जोड़ेंगे।

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