2011 विश्वकप : अनहोनी को होनी कर दिया धोनी ने

2015 में पहुंचे समीफाइनल तक

Webdunia
शुक्रवार, 31 मई 2019 (13:11 IST)
यह तीसरी बार था जब विश्वकप भारतीय उपमहाद्वीप में आयोजित किया गया। 2003 में विश्वकप में बेहद करीब पहुंचने के बावजूद विश्वकप को हथिया ना पाने की टीस पूरी तरह से इस विश्वकप में दिखाई पड़ी ।

पहले मैच में भारत ने बांग्लादेश के साथ खेलते हुए ग्रुप मैच में वीरेंद्र सहवाग के 175 रनों की बदौलत 373 रनों का पहाड़ जैसा लक्ष्य खड़ा किया और बांग्लादेश को बुरी तरह हराकर 2007 की हार का असल मायनों में बदला लिया। भारत के सामने जो भी टीम आई, उसे भारत ने बुरी तरह धोया। इंग्लैंड से हुए अगले मैच में रोमांच की हदें पार हो गई। भारत 338 रन बना दिए लेकिन इंग्लैंड ने इतने ही रन बनाकर मैच टाई करा लिया।
 
इसके बाद भारत का अगला मुकाबला आयरलैंड और नीदरलैंड से हुआ। दोनों ही टीमों को कम स्कोर पर रोकने के बाद भी भारत ने जीत 5 विकेट गंवा कर हासिल की। 
 
भारत ने इस विश्वकप में एकमात्र मैच साउथ अफ्रीका के खिलाफ गंवाया ।मजबूत शुरुआत के बाद भारत की पारी 296 रनों पर ही रुक गई। साउथ अफ्रीका के पार्नेल ने आशीष नेहरा के पारी के आखिरी ओवर में ताबड़तोड़ रन बनाते हुए भारत के हाथों से मैच छीन लिया। 
 
वेस्टइंडीज से हुए मैच में भारत को असली लय प्राप्त हुई। 269 रनों का पीछा करने उतरी वेस्टइंडीज एक समय अच्छी स्थिती में थी। लेकिऩ भारत ने लगातार विकेट चटकाते हुए मैच 80 रनों से जीत लिया।
 
क्वार्टरफाइनल में भारत की मुलाकात तीन बार की विश्वविजेता ऑस्ट्रेलिया से हुई।भारत ने इस मैच को बड़ी आसानी से 5 विकेट से जीतते हुए ऑस्ट्रेलिया को बाहर का रास्ता दिखाया।
 
सेमीफाइनल में भारत का मुकाबला चिर प्रतिद्वंदी पाकिस्तानी टीम से हुआ। पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम तेजी से आगे बढ़ रही थी पर सहवाग के जाते साथ नियमित अंतराल में विकेट गिरते रहे। भारत 260 रन बना सका। वहीं जवाब में पाकिस्तानी टीम महज 231 रन बना सकी। 
 
भारत का फाइनल में मुकाबला श्रीलंका से हुआ। महेला जयवर्धने के शतक की बदौलत श्रीलंका ने भारत को 275 रनों का लक्ष्य दिया। लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम एक समय खराब स्थिती में थी।  भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ऊपर बल्लेबाजी करने आए। कुलसेखरा की गेंद पर छक्का लगाते हुए विश्वकप उन्होंने भारत के नाम किया। उनका यह आखिरी छक्का आज भी क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में ताजा है।
 
2015 में पहुंचे समीफाइनल तक 
 
विश्व कप 2015 में टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन किया। ऑस्ट्रेलिया दौरे पर टेस्ट और त्रिकोणीय श्रृंखला में पराजय झेल चुकी टीम इंडिया वर्ल्ड कप में नए तेवर के साथ नजर आई। टीम इंडिया ने वर्ल्ड कप में लगातार सात मैचों में जीत करके यह बता दिया कि उसे कमतर नहीं आंका जाए। भारतीय टीम के खिलाड़ियों ने पूरे विश्व कप टूर्नामेंट में बल्लेबाजी और गेंदबाजी के धमाकेदार प्रदर्शन से टीम इंडिया को सेमीफाइनल तक पहुंचाया। सेमीफाइनल में भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया से 96 रनों से हार गई। 

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